हरी साड़ी में सजी सवरी
सुन्दर सी यह - प्रकृति है
मत करो खिलवाड तुम इससे
हम सब पर यह भारी है
मत लो परीक्षा इसकी ममता की
ना उपवन को उजाडो तुम
हरी भरी इस धरती माँ की
मत कोख उजाडो तुम
लेना इसने सीखा नही
बस देती ही रहती है
फिर क्यू छीनने पर उतर आये
जब बिन मांगे यह देती है
सुखी पड़ी इस जमी पर
एक पेड़ लगा कर देखो तुम
खिल जाएगा तुम्हारा आँगन
उसकी सुन्दरता को समझो तुम
एक नहीं सौ फायदे
इस बात को समझो तुम
हरे - भरे वृक्षों के नीचे
अपना जीवन जी लो तुम
Nature teaches us a lot ! inspirational by sourabh rathore.
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