आती है मगर बुलाने का नही
हौसले जाबाज है इसे कोई भ्रमीत नही कर सकता !!
बुलाने का अवसर देगे ,तुम्हे मगर थोड़ासा सब्र करो!
हमने उड़ाने भर ली है, वो अब रुखने का नाम नही लेगी!
जीत का घोष का कफन पहना है अब हारना समय की धार नही!
सब्र है इस माटी की कसम देश को तोहफा जो देना है-2
✍Sourabh
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