शनिवार, 29 मई 2021

🍁🍁 हाँ वो स्त्री ना जाने कहा खो गयी✍🍁

 



माथे   पे  बिंदिया  नेनो  मे  कजरा 

 लज्जा  को  गहना  बनाए 

संस्कारो के साथ बहती नदी सी

 हा  वो स्त्री ना जाने कहा खो गयी 

                                 लम्बे से कैश , फुलो से सजे हुए

                                गजरे की महक से  गुंजति हर गली

                               चहकता सा आगंन महकती-सी बगिया

                                हा वो स्त्री ना जाने  कहा खो गयी 

कलाई में बन्द - चुडी सी 

 पायल की छन - छन से छनकति

चिखती चिल्लाती मस्ती मे झूमती

 हां वो स्त्री ना जाने कहा खो गयी ।


"आवाज भावना शर्मा"






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